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भूँगरू सिंचाई प्रणाली: सूखे मौसम के लिए मानसून के पानी का भंडारण

स्मार्ट किसान समाचार 3 min
nishtha kawrani
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भूँगरू सिंचाई प्रणाली: सूखे मौसम के लिए मानसून के पानी का भंडारण

મુખ્ય માહિતી

મુખ્ય માહિતી

  • मानसून के दौरान जलभराव और सूखे के मौसम में सिंचाई की कमी की दोहरी चुनौती का सामना कर रहे किसान भूँगरू सिंचाई प्रणाली (Bhungroo irrigation system) का उपयोग कर सकते हैं।
  • खारेपन से प्रभावित क्षेत्रों में, यह प्रक्रिया भूजल की लवणता को कम करने में भी मदद कर सकती है, जिससे भूमि की उत्पादकता बढ़ सकती है।स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर कस्टम डिज़ाइनइस तकनीक के लिए कोई एक ही डिज़ाइन सभी के लिए उपयुक्त नहीं है।
  • चूंकि मिट्टी के प्रकार, ढलान और भूमिगत जलभृत की स्थितियाँ हर खेत में अलग-अलग होती हैं, इसलिए प्रत्येक इकाई को कस्टम-इंजीनियर किया जाना चाहिए।
  • प्रत्येक प्रणाली के लिए सही स्थान और कार्यान्वयन रणनीति की पहचान करने के लिए किसानों का स्थानीय ज्ञान महत्वपूर्ण है।महिला किसानों को सशक्त बनानाकार्यान्वयन के लिए एक प्रमुख मॉडल में पाँच महिला किसानों के समूह शामिल हैं।
  • इस व्यवस्था के तहत, प्रणाली को एक सदस्य की भूमि पर स्थापित किया जा सकता है, लेकिन संचित पानी समूह के बीच साझा किया जाता है।

मानसून के दौरान जलभराव और सूखे के मौसम में सिंचाई की कमी की दोहरी चुनौती का सामना कर रहे किसान भूँगरू सिंचाई प्रणाली (Bhungroo irrigation system) का उपयोग कर सकते हैं। यह नवाचार किसानों को अतिरिक्त वर्षा जल को संचित करने की अनुमति देता है, जो अन्यथा खेतों में बाढ़ का कारण बनता है, और इसे सुरक्षित रूप से भूमिगत संग्रहित करके बाद में उपयोग के लिए एक मौसमी जल बैंक बनाता है।

भूँगरू सिंचाई प्रणाली कैसे काम करती है

यह प्रणाली जल की कमी के लिए एक व्यावहारिक समाधान के रूप में डिज़ाइन की गई है। यह एक सरल, स्थानीयकृत प्रक्रिया के माध्यम से काम करती है:

  • संग्रहण: भारी बारिश के दौरान अतिरिक्त सतही जल को पकड़ने के लिए एक सीमेंटेड गड्ढा बनाया जाता है।
  • निस्पंदन और इंजेक्शन: एकत्रित पानी को फ़िल्टर किया जाता है और 100 मीटर तक गहरे खोदे गए पाइप में निर्देशित किया जाता है।
  • भंडारण: पानी को उपयुक्त भूमिगत जलभृत परतों (aquifer layers) में धकेला जाता है, जहाँ यह आवश्यकता होने तक रहता है।
  • निष्कर्षण: सूखे के महीनों के दौरान, किसान सिंचाई के लिए इस संचित पानी को वापस सतह पर पंप कर सकते हैं।

पानी को भूमिगत रखने से, यह प्रणाली वाष्पीकरण के नुकसान को काफी कम करती है और खड़ी फसलों को जलभराव से बचाती है। खारेपन से प्रभावित क्षेत्रों में, यह प्रक्रिया भूजल की लवणता को कम करने में भी मदद कर सकती है, जिससे भूमि की उत्पादकता बढ़ सकती है।

स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर कस्टम डिज़ाइन

इस तकनीक के लिए कोई एक ही डिज़ाइन सभी के लिए उपयुक्त नहीं है। चूंकि मिट्टी के प्रकार, ढलान और भूमिगत जलभृत की स्थितियाँ हर खेत में अलग-अलग होती हैं, इसलिए प्रत्येक इकाई को कस्टम-इंजीनियर किया जाना चाहिए। प्रत्येक प्रणाली के लिए सही स्थान और कार्यान्वयन रणनीति की पहचान करने के लिए किसानों का स्थानीय ज्ञान महत्वपूर्ण है।

महिला किसानों को सशक्त बनाना

कार्यान्वयन के लिए एक प्रमुख मॉडल में पाँच महिला किसानों के समूह शामिल हैं। इस व्यवस्था के तहत, प्रणाली को एक सदस्य की भूमि पर स्थापित किया जा सकता है, लेकिन संचित पानी समूह के बीच साझा किया जाता है। इस सहयोगात्मक दृष्टिकोण ने कई महिलाओं को अपनी वार्षिक फसल को साल में दो या तीन बार तक बढ़ाने में सक्षम बनाया है, जिससे खाद्य सुरक्षा और घरेलू आय दोनों में वृद्धि हुई है। Naireeta Services जैसे संगठन सिंचाई तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए इन प्रबंधन समूहों के केंद्र में महिलाओं को रखने में सहायक रहे हैं।

प्रभाव और मान्यता

2004 में पहला संस्करण विकसित किए जाने के बाद से, यह तकनीक गुजरात से बाहर अन्य भारतीय राज्यों और बांग्लादेश, घाना और वियतनाम सहित अन्य देशों में फैल गई है। इस प्रणाली ने अनिश्चित वर्षा पैटर्न के अनुकूल होने में किसानों की मदद करने की अपनी क्षमता के लिए संयुक्त राष्ट्र के 'मोमेंटम फॉर चेंज' पुरस्कार और विश्व बैंक के 'इंडिया डेवलपमेंट मार्केटप्लेस' पुरस्कार सहित अंतरराष्ट्रीय मान्यता अर्जित की है।

लेखक और स्रोत की जानकारी

स्रोत: Thebetterindia
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AI सहायता: इस लेख को तैयार करने में AI तकनीक की सहायता ली गई है।

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