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फसल पोषण

कपास उर्वरक प्रबंधन गाइड: NPK और फर्टिगेशन

SK
Smart Khedut Agri-Expert Team
Published: 18 Jun 2026
Updated: 06 Aug 2026
18 min detailed guide
45,138 Views
कपास उर्वरक प्रबंधन गाइड: NPK और फर्टिगेशन

भारत और गुजरात में कपास (Cotton) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली नकदी फसल (Cash Crop) है, जिसे 'सफेद सोना' (White Gold) भी कहा जाता है। हालांकि, बदलते मौसम और जमीन की घटती उर्वरक क्षमता के बीच, केवल पारंपरिक खेती से अधिकतम उत्पादन प्राप्त करना अब संभव नहीं है। सही कपास में उर्वरक प्रबंधन (Cotton Fertilizer Management) ही सफलता की कुंजी है।

अधिकांश किसान आवश्यकता से अधिक यूरिया (नाइट्रोजन) का उपयोग करते हैं, जिससे पौधे की ऊंचाई तो बढ़ती है, लेकिन टिंडे (Bolls) कम आते हैं। इस संपूर्ण गाइड में हम cotton fertilizer schedule, cotton fertigation और micronutrient deficiency के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

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📋 विषय सूची (Table of Contents)

1. भूमि की तैयारी और मिट्टी परीक्षण (Land Preparation & Soil Testing)

कपास के अच्छे उत्पादन के लिए भूमि की तैयारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। गर्मियों में गहरी जुताई करनी चाहिए ताकि मिट्टी में मौजूद फफूंद और कीटों के प्यूपा नष्ट हो सकें। मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखने की क्षमता बढ़ाने के लिए 2 से 3 बार कल्टीवेटर या हैरो चलाएं।

बुवाई से 15 से 20 दिन पहले मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) करवाना अनिवार्य है। इससे मिट्टी में किन तत्वों की कमी है, इसका सटीक पता चलता है और अनावश्यक उर्वरकों का खर्च बचता है।

कपास की बुवाई के लिए भूमि की तैयारी और मिट्टी परीक्षण
चित्र 1: मिट्टी परीक्षण के अनुसार उर्वरक की योजना बनाना स्मार्ट खेती की पहचान है।

2. कपास के लिए प्रमुख पोषक तत्वों का महत्व (Importance of NPK)

कपास की फसल में नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P) और पोटाश (K) अलग-अलग समय पर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नीचे दी गई तालिका के माध्यम से इसे आसानी से समझें:

पोषक तत्व मुख्य कार्य (Function) कमी के लक्षण (Deficiency)
नाइट्रोजन (N) वानस्पतिक विकास और पत्तियों को हरा-भरा रखना। पुरानी पत्तियों का पीला पड़ना और विकास रुकना।
फास्फोरस (P) जड़ों का विकास और फूल-गुड़ियां (Squares) बनने में मदद। जड़ें कमजोर रहना, पत्तियों का रंग गहरा हरा या बैंगनी होना।
पोटाश (K) टिंडे (Bolls) का विकास, वजन बढ़ाना और सूखा रोग से बचाव। टिंडों का आकार छोटा रहना, वजन घटना, रुई की चमक कम होना।
कपास के पौधे के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का महत्व
चित्र 2: कपास में NPK उर्वरक का संतुलन फसल के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।
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3. कपास में NPK उर्वरक का आदर्श शेड्यूल (Cotton Fertilizer Schedule)

गुजरात और भारतीय जलवायु के अनुसार 1 एकड़ (Acre) कपास के लिए 96 किलो नाइट्रोजन, 20 किलो फास्फोरस और 20 किलो पोटाश की सिफारिश की जाती है।

कपास का उर्वरक शेड्यूल और समय सारणी
चित्र 3: समय पर और सही मात्रा में दिया गया उर्वरक उत्पादन में 30% तक की वृद्धि करता है।
  • बुवाई के समय (बेसल डोज़): 1 बैग DAP + 2 ट्रैक्टर गोबर की खाद + 250 ग्राम माइकोराइजा।
  • 25 से 30 दिन पर: 25 किलो यूरिया + 5 किलो सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients)।
  • 50 से 60 दिन पर (फूल आने की अवस्था): 30 किलो यूरिया + 15 किलो पोटाश (MOP)। यह चरण सबसे महत्वपूर्ण है।
  • 75 से 85 दिन पर (टिंडे के विकास की अवस्था): 25 किलो यूरिया + 10 किलो कैल्शियम नाइट्रेट।
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4. ड्रिप सिंचाई द्वारा फर्टीगेशन (Cotton Fertigation via Drip System)

ड्रिप के माध्यम से सीधे पानी में घुलनशील उर्वरक देने से उर्वरक की 30% बचत होती है और उत्पादन में 20-30% की सीधी वृद्धि देखने को मिलती है।

कपास में ड्रिप सिंचाई द्वारा फर्टीगेशन पद्धति
चित्र 4: ड्रिप विधि से पानी और खाद सीधे पौधे की जड़ों तक पहुँचते हैं।
  • 15 से 30 दिन: 19:19:19 उर्वरक हर हफ्ते 3 किलो दें।
  • 40 से 60 दिन (फूल आने की अवस्था): 12:61:00 या 0:52:34 देने से फूल और गुड़ियां अधिक आएंगी।
  • 70 से 90 दिन: 13:0:45 (पोटेशियम नाइट्रेट) दें।
  • 100 दिन के बाद: 0:0:50 देने से टिंडे का आकार और वजन काफी बढ़ता है।
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5. पोषक तत्वों की कमी और उसके लक्षण (Nutrient Deficiency)

NPK के अलावा कपास को जिंक, बोरोन और मैग्नीशियम की भी आवश्यकता होती है।

कपास की पत्तियों का लाल होना और मैग्नीशियम की कमी
चित्र 5: पत्तियों का लाल होना मैग्नीशियम की गंभीर कमी को दर्शाता है।
🔴 कपास की पत्तियों का लाल होना (Magnesium Deficiency):

पुरानी पत्तियां किनारों से लाल होने लगती हैं और धीरे-धीरे पूरी पत्ती लाल होकर सूख जाती है।
उपाय: 100 ग्राम मैग्नीशियम सल्फेट को 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

कपास में बोरोन की कमी से फूल और गुड़ियों का गिरना
चित्र 6: बोरोन की कमी से फूल और गुड़ियां विकृत होकर गिर जाती हैं।
🍂 फूल और गुड़ियों (Squares) का झड़ना (Boron Deficiency):

टिंडे बनने से पहले गुड़ियां पीली पड़कर बड़ी मात्रा में झड़ जाती हैं।
उपाय: 20 ग्राम बोरोन (Boron 20%) का पर्णीय छिड़काव (Foliar Spray) करें।

6. उत्पादन बढ़ाने के स्मार्ट टिप्स (Yield Boosters)

कपास का उत्पादन बढ़ाने के स्मार्ट खेती टिप्स
चित्र 7: आधुनिक खेती पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन दोगुना किया जा सकता है।
  1. प्लानोफिक्स का छिड़काव (Planofix): फूल और गुड़ियों को झड़ने से रोकने के लिए 4.5 मिली प्लानोफिक्स को 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें।
  2. शीर्ष कटाई (Nipping): जब पौधा 80-90 दिन का हो जाए, तो उसके मुख्य शीर्ष (ऊपरी भाग) को तोड़ दें, ताकि साइड की शाखाएं और टिंडे बढ़ें।
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7. 1 एकड़ कपास में खर्च और मुनाफा (Cost & Profit Calculation)

यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति और सही फर्टीगेशन शेड्यूल को अपनाते हैं, तो 1 एकड़ से औसतन 10 से 15 क्विंटल कपास का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

  • अनुमानित खर्च: बीज, खाद, दवा और मजदूरी मिलाकर एक एकड़ में लगभग ₹20,000 से ₹25,000 का खर्च आता है।
  • संभावित आय: यदि बाजार भाव ₹7500 से ₹8000 प्रति क्विंटल हो, तो ₹75,000 से ₹1,20,000 तक की आय हो सकती है।
  • शुद्ध मुनाफा: सभी खर्चों को निकालकर किसान 1 एकड़ में ₹50,000 से ₹95,000 तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।

8. सरकारी सहायता और योजनाएं (Government Subsidies)

किसानों का खर्च कम करने के लिए राज्य सरकार (जैसे गुजरात में I-Khedut पोर्टल) और केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न सब्सिडी प्रदान की जाती हैं:

  • ड्रिप सिंचाई सहायता: GGRC या राज्य कृषि विभागों के माध्यम से टपक सिंचाई प्रणाली लगाने पर 70% से 90% तक की सब्सिडी मिलती है।
  • तिरपाल और स्प्रे पंप: मानसून में फसल को बचाने के लिए तिरपाल और दवा छिड़कने वाले पंप पर अनुदान।
  • PM-Kisan योजना: हर साल किसानों के सीधे खाते में ₹6000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
किसानों के लिए सरकारी सहायता और सब्सिडी योजनाएं
चित्र 8: सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं।
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❓ 9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Cotton Fertilizer FAQs)

1. कपास में DAP कितनी मात्रा में देना चाहिए?

कपास की बुवाई के समय बेसल डोज़ के रूप में 1 एकड़ में 1 बैग (50 किलो) डीएपी (DAP) देना आदर्श माना जाता है।

2. कपास में यूरिया खाद कितनी बार में देना चाहिए?

यूरिया कभी भी एक साथ न दें। इसे बुवाई के 30 दिन, 55 दिन और 80 दिन पर 3 समान किश्तों में बांटकर देना चाहिए।

3. कपास की पत्तियां लाल क्यों हो जाती हैं?

यह मुख्य रूप से मैग्नीशियम (Magnesium) की कमी के कारण होता है। जमीन में नमी की कमी या पानी भरा रहने से भी यह समस्या आती है।

4. कपास में बोरोन का छिड़काव कब करना चाहिए?

जब कपास में फूल और गुड़ियां (Squares) आने की शुरुआत हो (लगभग 55-60 दिन पर), तब बोरोन का छिड़काव करना सर्वोत्तम होता है।

5. ड्रिप सिंचाई में सबसे महत्वपूर्ण खाद कौन सी चलानी चाहिए?

शुरुआती विकास के लिए 19:19:19 और फूल आने की अवस्था में 0:52:34 सबसे महत्वपूर्ण घुलनशील उर्वरक हैं।

6. कपास में पोटाश खाद के क्या फायदे हैं?

पोटाश (Potash) टिंडों का वजन बढ़ाता है, रुई की गुणवत्ता सुधारता है और फसल को सूखा या विल्ट (Wilt) रोग से सुरक्षा देता है।

7. 1 एकड़ कपास में उर्वरक का अनुमानित खर्च कितना आता है?

बुवाई से लेकर अंतिम चरण तक रासायनिक उर्वरकों का 1 एकड़ का खर्च लगभग ₹3500 से ₹4500 तक आता है।

8. कपास में सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व कौन सा माना जाता है?

सभी पोषक तत्व जरूरी हैं, लेकिन फास्फोरस जड़ों के विकास के लिए और पोटाश टिंडों के वजन के लिए सबसे निर्णायक साबित होता है।

9. क्या कपास में जीवामृत का उपयोग किया जा सकता है?

हाँ, हर 15-20 दिन में जीवामृत देने से मिट्टी में मित्र बैक्टीरिया बढ़ते हैं और रासायनिक खाद का खर्च 50% तक कम हो सकता है।

10. फूल और गुड़ियों का झड़ना रोकने के लिए किस दवा का स्प्रे करें?

15 लीटर पानी में 20 ग्राम बोरोन और 4.5 मिली प्लानोफिक्स (Planofix) मिलाकर छिड़काव करने से फूलों और गुड़ियों का झड़ना रुकता है।


📚 जानकारी के स्रोत (References & Sources)

  • Indian Council of Agricultural Research (ICAR)
  • Junagadh Agricultural University (JAU)
  • Anand Agricultural University (AAU)
  • Gujarat Agriculture Department (Krishi Bhavan)
SK

लेखक के बारे में (About the Author)

यह लेख Smart Khedut Agri Expert Team द्वारा कृषि विश्वविद्यालयों की सिफारिशों, ICAR के दिशा-निर्देशों और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों के वर्षों के फील्ड अनुभव के आधार पर तैयार किया गया है।