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आज के टिंडा के भाव

फसल तेजी

टिंडा

गुजरात भर में टिंडा के नवीनतम नीलामी रेट्स

टिंडा मंडी सारांश

अंतिम अपडेट: 05 Aug 2026, 12:00 AM

112 मंडियां
उच्चतम मूल्य ₹1,400
न्यूनतम मूल्य ₹200
औसत मोडल ₹897
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आज का बाजार विश्लेषण

आज गुजरात की मंडियों में टिंडा की आवक सामान्य रही है। बाजार में अधिकतम मूल्य ₹1,400 दर्ज किया गया है, जबकि औसत मोडल भाव ₹897 के आसपास है। कुल 112 मंडियों के अनुसार बाजार में तेजी का रुख है।

बेंचमार्क: 20 किलो (1 मण) सत्यापित APMC डेटा

इन मंडियों में उपलब्ध है

प्रति 20 किलो
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🌱 टिंडा के बारे में और पूर्ण प्रोफ़ाइल

टिंडा, जिसे वैज्ञानिक रूप से 'प्रैसिट्रुलस फिस्टुलोसस' के रूप में जाना जाता है, गुजरात में व्यापक रूप से उगाई जाने वाली एक लोकप्रिय सब्जी है। इसे 'एप्पल गॉर्ड' के नाम से भी जाना जाता है। टिंडा अपने उच्च पोषण मूल्य, विटामिन और फाइबर के कारण भारतीय घरों में बहुत महत्वपूर्ण है। गुजरात में, टिंडा की खेती छोटे और सीमांत किसानों के लिए बहुत लाभदायक है क्योंकि इसका विकास चक्र छोटा है और शहरी बाजारों में इसकी मांग अधिक है। यह फसल गुजरात की गर्म और अर्ध-शुष्क जलवायु में, विशेष रूप से उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र के क्षेत्रों में बहुत अच्छी तरह से होती है। टिंडा की खेती के लिए 6.5 से 7.5 pH वाली अच्छी जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिट्टी आदर्श मानी जाती है। किसान टिंडा को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि अन्य लौकी वर्गीय फसलों की तुलना में इसमें कीटों का प्रकोप कम होता है, हालांकि मानसून के दौरान फंगल रोगों से बचने के लिए सावधानी बरतना आवश्यक है। गर्मियों के महीनों में टिंडा की मांग अधिक रहती है, जो किसानों के लिए आय का एक बड़ा स्रोत है। एपीएमसी (APMC) बाजारों में समान आकार और कोमल टिंडा की मांग अधिक होने के कारण, जो किसान गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करते हैं, उन्हें बेहतर दाम मिलते हैं। यह फसल मुख्य रूप से दो मौसमों में ली जाती है: ग्रीष्मकालीन फसल (जनवरी-फरवरी में बुवाई) और मानसून फसल (जून-जुलाई में बुवाई)। गुजरात में ड्रिप सिंचाई पद्धति के उपयोग से टिंडा के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है। आधुनिक कृषि पद्धतियों और हाइब्रिड बीजों के उपयोग से किसान अपनी आय में काफी वृद्धि कर सकते हैं। टिंडा केवल एक सब्जी नहीं है, बल्कि गुजरात की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक फसल है, जो किसान परिवारों को त्वरित आय और टिकाऊ आजीविका प्रदान करती है।
बुवाई और कटाई 🌾 बुवाई: जनवरी-फरवरी (ग्रीष्मकालीन) और जून-जुलाई (मानसून) ✂️ कटाई: मार्च-मई (ग्रीष्मकालीन फसल) और अगस्त-अक्टूबर (मानसून फसल)
उपयुक्त मिट्टी का प्रकार 🪨 6.5-7.5 pH वाली अच्छी जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिट्टी
भंडारण और संरक्षण 🏠 ठंडी, सूखी और हवादार जगह पर स्टोर करें; फंगल विकास और चोट से बचने के लिए ढेर में रखने से बचें।
📢
messages.farmer_advisory • टिंडा

1. बाजार में प्रीमियम मूल्य प्राप्त करने के लिए टिंडा की तुड़ाई तब करें जब वे कोमल और हल्के हरे रंग के हों। 2. एपीएमसी भेजने से पहले टिंडा की सतह से मिट्टी और धूल हटाने के लिए उन्हें मुलायम कपड़े से साफ करें। 3. आकार और वजन के अनुसार ग्रेडिंग करें; एक समान आकार के लॉट को नीलामी में काफी अधिक दाम मिलते हैं। 4. तुड़ाई के बाद सड़न रोकने के लिए सिंचाई के तुरंत बाद तुड़ाई न करें ताकि नमी का स्तर कम रहे। 5. ताजगी बनाए रखने और गर्मी से बचने के लिए प्लास्टिक बैग के बजाय हवादार क्रेट्स का उपयोग करें।

📈 7-दिवसीय मूल्य रुझान

प्रति 20 किलो

टिंडा का व्यापार करने वाली अन्य मंडियां (भाग 2)

संबंधित मार्केट यार्ड

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❓ किसान सहायता केंद्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजकोट, गोंडल और जूनागढ़ जैसे गुजरात के प्रमुख बाजारों में टिंडा का औसत मॉडल भाव ₹835 प्रति क्विंटल है।
वर्तमान में, गुणवत्ता और मांग के आधार पर टिंडा का भाव न्यूनतम ₹200 से अधिकतम ₹1,500 प्रति क्विंटल के बीच है।
नहीं, टिंडा एक नाशवान सब्जी है और यह सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) योजना के अंतर्गत नहीं आता है।
टिंडा को आकार, रंग और ताजगी के आधार पर ग्रेड करें। खराब या अधिक पके हुए टिंडा को हटा दें ताकि माल एकसमान रहे और APMC में अच्छी बोली मिले।
टिंडा में पानी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसे ठंडी और हवादार जगह पर रखें और जल्दी बेचें ताकि नमी कम न हो।
राजकोट या गोंडल जैसी APMC में सुबह का समय टिंडा बेचने के लिए सबसे अच्छा है ताकि माल ताजा रहे और व्यापारियों से बेहतर भाव मिल सके।
कटाई के तुरंत बाद टिंडा को धोने से बचें। उन्हें छायादार और ठंडी जगह पर रखें और परिवहन के लिए हवादार क्रेट का उपयोग करें।
गुजरात में टिंडा के व्यापार के लिए राजकोट, गोंडल और जूनागढ़ APMC प्रमुख बाजार हैं।

🔗 किसानों के लिए अन्य उपयोगी जानकारी

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