शंकरभाई चौधरी ने VAMNICOM दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की
पुणे में स्थित वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान (VAMNICOM) ने हाल ही में अपने प्रमुख शैक्षणिक कार्यक्रम के 32वें बैच के लिए दीक्षांत समारोह आयोजित किया। यह कार्यक्रम 2024-26 शैक्षणिक सत्र के लिए पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट-एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट (PGDM-ABM) में नामांकित छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।
इंडियन कोऑपरेटिव की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष और बनास डेयरी के चेयरमैन के रूप में कार्यरत शंकरभाई चौधरी ने मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम में भाग लिया। समारोह के दौरान, उन्होंने कार्यवाही की अध्यक्षता की और स्नातक छात्रों को औपचारिक रूप से डिग्रियां प्रदान कीं।
PGDM-ABM कार्यक्रम का अवलोकन
PGDM-ABM एक विशेष प्रबंधन पाठ्यक्रम है जो व्यावसायिक सिद्धांतों और कृषि क्षेत्र के अंतर्संबंधों पर केंद्रित है। एक संस्थान के रूप में, VAMNICOM सहकारी प्रबंधन शिक्षा पर अपने ध्यान के लिए जाना जाता है। दीक्षांत समारोह उन छात्रों के लिए शैक्षणिक यात्रा के औपचारिक समापन का प्रतीक है जिन्होंने इस कठोर प्रबंधन पाठ्यक्रम को पूरा किया है।
शंकरभाई चौधरी की भूमिका
मुख्य अतिथि के रूप में शंकरभाई चौधरी की उपस्थिति VAMNICOM में प्रदान किए जाने वाले शैक्षणिक प्रशिक्षण और डेयरी एवं सहकारी क्षेत्रों में आवश्यक व्यावहारिक नेतृत्व के बीच के संबंध को उजागर करती है। बनास डेयरी के चेयरमैन के रूप में अपनी क्षमता के साथ, चौधरी शैक्षणिक परिवेश में बड़े पैमाने पर सहकारी संचालन का महत्वपूर्ण अनुभव लेकर आते हैं।
डिग्रियां प्रदान करके, चौधरी ने आधिकारिक तौर पर 32वें बैच की शैक्षणिक उपलब्धियों को मान्यता दी और एग्रीबिजनेस तथा प्रबंधन परिदृश्य में पेशेवर भूमिकाओं के लिए उनकी तैयारी की सराहना की। यह समारोह संस्थान के लिए एक प्रमुख वार्षिक कार्यक्रम है, जो उद्योग के नेताओं और प्रबंधन पेशेवरों की अगली पीढ़ी को एक साथ लाता है।
कार्यक्रम का मुख्य विवरण
- मुख्य अतिथि: शंकरभाई चौधरी, अध्यक्ष, गुजरात विधानसभा और चेयरमैन, बनास डेयरी।
- संस्थान: वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान (VAMNICOM), पुणे।
- कार्यक्रम: पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट-एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट (PGDM-ABM)।
- बैच: 32वां बैच (2024-26)।
यह कार्यक्रम भारत में सहकारी और एग्रीबिजनेस क्षेत्रों में विशेष शिक्षा पर निरंतर जोर को रेखांकित करता है। जैसे-जैसे ये छात्र कक्षा से पेशेवर कार्यबल में प्रवेश कर रहे हैं, चौधरी जैसे स्थापित नेताओं की भागीदारी शैक्षणिक सिद्धांत और उद्योग की व्यावहारिक मांगों के बीच की खाई को पाटने का काम करती है।