गुजरात में नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रामीण आर्थिक बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है, जहाँ एक नए कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट का उद्घाटन किया गया है। बनासकांठा जिले के विंछीवाड़ी में स्थित, यह सुविधा गोबर को संसाधित करके स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन करने के लिए डिज़ाइन की गई है, साथ ही यह स्थानीय डेयरी समुदाय के लिए आय का एक नया स्रोत भी तैयार कर रही है।
विंछीवाड़ी CBG परियोजना का अवलोकन
हाल ही में शुरू किए गए इस प्लांट की प्रसंस्करण क्षमता 100 MTPD (मीट्रिक टन प्रति दिन) है। प्राथमिक फीडस्टॉक के रूप में गोबर का उपयोग करके, यह सुविधा कृषि अपशिष्ट को कंप्रेस्ड बायोगैस में बदल देती है, जो एक टिकाऊ ईंधन स्रोत है और पारंपरिक जीवाश्म ईंधन का एक हरित विकल्प है।
इंडियन कोऑपरेटिव के अनुसार, इस प्लांट की स्थापना क्षेत्रीय डेयरी पारिस्थितिकी तंत्र में वेस्ट-टू-एनर्जी (अपशिष्ट से ऊर्जा) तकनीक को एकीकृत करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। जैविक कचरे को एक मूल्यवान वस्तु में परिवर्तित करके, यह परियोजना डेयरी कार्यों से जुड़े लोगों के लिए पर्यावरणीय स्थिरता और आर्थिक दक्षता दोनों को संबोधित करना चाहती है।
डेयरी किसानों के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण
इस परियोजना का उद्घाटन गुजरात विधानसभा अध्यक्ष और बनास डेयरी के अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी द्वारा किया गया। उद्घाटन के दौरान, चौधरी ने पशुधन अपशिष्ट के उपयोग की व्यापक क्षमता पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि यह पहल अपशिष्ट उत्पादों के मूल्य के संबंध में एक विशिष्ट दृष्टिकोण के अनुरूप है।
“गोबर है...”
हालाँकि रिपोर्ट में उद्धृत दृष्टिकोण का पूर्ण विवरण नहीं दिया गया है, लेकिन परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य स्पष्ट है: डेयरी किसानों को आय का एक अतिरिक्त स्रोत प्रदान करना। गोबर के लिए बाजार बनाकर, यह प्लांट डेयरी फार्मिंग के उप-उत्पाद को एक कार्यात्मक संपत्ति में बदलने में मदद करता है, जिससे स्थानीय कृषि क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता में सुधार हो सकता है।
कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को समझना
कंप्रेस्ड बायोगैस, जिसे अक्सर CBG कहा जाता है, अनिवार्य रूप से शुद्ध बायोगैस है जिसे ईंधन के रूप में उपयोग करने के लिए संपीड़ित (कंप्रेस) किया गया है। इस प्रक्रिया में मीथेन-युक्त गैस का उत्पादन करने के लिए जैविक पदार्थों—इस मामले में, गोबर—का अवायवीय अपघटन (anaerobic decomposition) शामिल है। एक बार परिष्कृत और संपीड़ित होने के बाद, इस गैस का उपयोग परिवहन और औद्योगिक अनुप्रयोगों सहित विभिन्न ऊर्जा जरूरतों के लिए किया जा सकता है।
विंछीवाड़ी प्लांट इस तकनीक का एक व्यावहारिक अनुप्रयोग है, जो यह दर्शाता है कि बड़े पैमाने पर डेयरी संचालन कैसे चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economy) में भाग ले सकते हैं। इस सुविधा के प्रमुख पहलुओं में शामिल हैं:
- स्थान: विंछीवाड़ी, बनासकांठा, गुजरात।
- क्षमता: 100 MTPD गोबर-आधारित प्रसंस्करण।
- प्राथमिक कार्य: जैविक कचरे को स्वच्छ ऊर्जा में बदलना।
- आर्थिक प्रभाव: डेयरी किसानों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत का सृजन।
बनास डेयरी की भूमिका
यह पहल क्षेत्र के एक प्रमुख संगठन बनास डेयरी द्वारा संचालित है। 100 MTPD प्लांट में निवेश करके, डेयरी सहकारी समिति खुद को ग्रामीण भारत में हरित ऊर्जा संक्रमण में सबसे आगे स्थापित कर रही है। यह परियोजना विकेंद्रीकृत ऊर्जा समाधानों को बढ़ाने में संस्थागत समर्थन के महत्व को रेखांकित करती है, विशेष रूप से बनासकांठा जैसे उच्च पशुधन घनत्व वाले क्षेत्रों में।
यह विकास डेयरी अपशिष्ट के प्रबंधन के तरीके में एक बदलाव का प्रतीक है, जो पारंपरिक निपटान विधियों से हटकर एक ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहा है जो ऊर्जा उत्पादन और संसाधन पुनर्प्राप्ति को प्राथमिकता देता है। जैसे-जैसे यह प्लांट चालू होगा, इससे इसी तरह की अन्य पहलों के लिए एक मॉडल के रूप में काम करने की उम्मीद है, जो मौजूदा ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों के साथ बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे को एकीकृत करने की व्यवहार्यता को प्रदर्शित करेगा।