कालावड़ के हरिपर गांव में पुलिस की कार्रवाई
जामनगर जिले के कालावड़ ग्रामीण पुलिस स्टेशन क्षेत्र के हरिपर गांव में राजकोट रेंज पुलिस ने संदिग्ध मिलावटी दूध के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। 23 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार छह संदिग्ध दूध कारोबारियों के घरों और डेयरियों पर छापेमारी की गई।
छापे के दौरान करीब 7,150 लीटर संदिग्ध दूध बरामद हुआ। इसके अलावा 120 किलो वनस्पति घी और 15 किलो दूध बनाने का पाउडर भी मिला।
निर्लिप्त राय के निर्देश पर कार्रवाई
रिपोर्ट के अनुसार राजकोट रेंज के उप महानिरीक्षक पुलिस निर्लिप्त राय (IPS) ने लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाली मिलावटी वस्तुओं के कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
इन निर्देशों के तहत पुलिस टीम ने मिली जानकारी का तकनीकी विश्लेषण और जांच करने के बाद हरिपर गांव में कार्रवाई की।
छह संदिग्ध स्थानों पर छापा
पुलिस ने हरिपर गांव में छह संदिग्ध दूध कारोबारियों के घरों और उनके पास स्थित अलग-अलग डेयरियों की जांच की। वहां से संदिग्ध दूध और दूध बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद हुई।
- संदिग्ध दूध: करीब 7,150 लीटर
- वनस्पति घी: 120 किलो
- दूध बनाने का पाउडर: 15 किलो
- दूध के सैंपल लिए गए
- फूड सेफ्टी विभाग ने आगे की कार्रवाई शुरू की
फूड सेफ्टी अधिकारियों ने लिए सैंपल
पुलिस ने फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारियों को सूचना दी, जिसके बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे। फूड सेफ्टी ऑफिसर ने संदिग्ध दूध के जरूरी सैंपल लिए और संबंधित सामग्री को सील कर अपने कब्जे में लिया।
रिपोर्ट के अनुसार संदिग्ध दूध, वनस्पति घी और दूध पाउडर को मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान न हो, इस तरह नष्ट कराया गया।
दूध कारोबारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
संदिग्ध मिलावटी दूध के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ फूड सेफ्टी विभाग द्वारा आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
दूध और दूध से बने उत्पाद रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा हैं, इसलिए मिलावट के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
ग्राहकों और किसानों के लिए जरूरी जानकारी
दूध या दूध से बने उत्पाद खरीदते समय विश्वसनीय स्रोत से ही सामान खरीदना चाहिए। यदि गुणवत्ता को लेकर कोई संदेह हो तो संबंधित फूड सेफ्टी विभाग को सूचना देना उचित है।
नोट: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी व्यक्ति या व्यवसाय को अंतिम रूप से दोषी तभी माना जाना चाहिए जब कानूनी प्रक्रिया या न्यायालय का अंतिम निर्णय सामने आए।
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