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कृषि समाचार

मोरबी के जेतपर किसानों के बिजली पोल मुआवजे मामले में बड़ा बयान, कांतिलाल अमृतिया ने क्या कहा?

मोरबी के जेतपर में बिजली पोल और हाई-टेंशन लाइन के मुआवजे को लेकर किसानों की चिंताओं के बीच कांतिलाल अमृतिया ने हालिया बयान दिया है। किसानों की जमीन, मुआवजे और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा यह मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है।

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मोरबी के जेतपर किसानों के बिजली पोल मुआवजे मामले में बड़ा बयान, कांतिलाल अमृतिया ने क्या कहा?

મુખ્ય માહિતી

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  • मोरबी के जेतपर में बिजली पोल और हाई-टेंशन लाइन के मुआवजे को लेकर किसानों की चिंताओं के बीच कांतिलाल अमृतिया ने हालिया बयान दिया है।
  • किसानों की जमीन, मुआवजे और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा यह मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है।

मोरबी के जेतपर किसानों का मुद्दा फिर चर्चा में

मोरबी जिले के जेतपर गांव में किसानों की जमीन से गुजरने वाली बिजली लाइन और बिजली पोल के मुआवजे का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। पिछले कुछ समय से किसान उचित मुआवजे, जमीन की सुरक्षा और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर से खेती पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

23 अगस्त 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार गुजरात के राज्य मंत्री और मोरबी विधायक कांतिलाल अमृतिया ने जेतपर किसानों के मुद्दे पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार या कोई कंपनी किसानों की जमीन छीनकर कहीं नहीं ले जा सकती और जमीन किसानों की ही रहेगी।

किसानों की मुख्य चिंता क्या है?

जेतपर किसानों की मुख्य चिंताओं में बिजली पोल और हाई-टेंशन लाइन से खेती की जमीन पर पड़ने वाला प्रभाव, उचित मुआवजा और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति शामिल है।

  • कृषि भूमि पर बिजली पोल और ट्रांसमिशन लाइन का प्रभाव
  • किसानों को मिलने वाले मुआवजे की चिंता
  • जमीन की कीमत और मुआवजा तय करने की प्रक्रिया
  • खेती के काम पर बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रभाव
  • किसानों और प्रशासन के बीच समाधान की आवश्यकता

जेतपर किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि

जेतपर में बिजली पोल और पावर ट्रांसमिशन लाइन के मुद्दे पर किसानों का आंदोलन पहले भी तेज हुआ था। जून और जुलाई 2026 के दौरान किसानों ने विरोध प्रदर्शन, उपवास और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए थे।

जुलाई में आंदोलन के तीसरे चरण के दौरान बड़ी संख्या में किसान और विभिन्न गांवों के प्रतिनिधि जुड़े। किसानों की प्रमुख मांग उचित मुआवजा और कृषि भूमि को कम से कम नुकसान पहुंचाना रही है।

सरकार की ओर से क्या महत्वपूर्ण है?

इस मामले में मुआवजा तय करने की प्रक्रिया और किसानों की मांगों को लेकर चर्चा हुई है। पिछली रिपोर्टों में बाजार दर को आधार बनाकर मुआवजा तय करने और किसानों की भागीदारी वाली प्रक्रिया की जानकारी भी सामने आई थी।

हालांकि किसी भी अंतिम मुआवजे या सरकारी नीति के लिए आधिकारिक सरकारी घोषणा को ही अंतिम आधार माना जाना चाहिए।

किसानों के लिए यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?

बिजली लाइन या पोल से जमीन के उपयोग, फसल उत्पादन, खेती की लागत और भविष्य में जमीन की कीमत पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए किसान मुआवजा तय करते समय जमीन की वास्तविक बाजार कीमत और खेती पर होने वाले प्रभाव को ध्यान में रखने की मांग कर रहे हैं।

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जेतपर और मोरबी किसान आंदोलन, बिजली लाइन मुआवजा, गुजरात की कृषि नीतियां, बारिश, फसल नुकसान और किसानों के लिए महत्वपूर्ण सरकारी घोषणाओं के ताजा अपडेट के लिए Smart Khedut से जुड़े रहें।

नोट: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। मुआवजे, सरकारी निर्णय या कानूनी स्थिति के संबंध में अंतिम जानकारी के लिए संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक घोषणा देखें।

लेखक और स्रोत की जानकारी

संपादकीय टीम

यह लेख उपलब्ध स्रोतों में दी गई जानकारी के आधार पर स्मार्ट किसान संपादकीय डेस्क द्वारा तैयार किया गया है.

स्रोत: Gujarat First
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