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इकोटूरिज्म, माइनस द इको

भारत ने इकोटूरिज्म को एक संरक्षण-उन्मुख मॉडल से तेजी से व्यावसायीकृत पर्यटन उद्योग में बदल दिया है, और ऐसा करने से पारिस्थितिक और सामुदायिक सिद्धांतों को कमजोर कर दिया है जिन्हें इकोटूरिज्म को बनाए रखना था।

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prakriti srivastava; ghazala shahabuddin
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इकोटूरिज्म, माइनस द इको

મુખ્ય માહિતી

મુખ્ય માહિતી

  • भारत ने इकोटूरिज्म को एक संरक्षण-उन्मुख मॉडल से तेजी से व्यावसायीकृत पर्यटन उद्योग में बदल दिया है, और ऐसा करने से पारिस्थितिक और सामुदायिक सिद्धांतों को कमजोर कर दिया है जिन्हें इकोटूरिज्म को बनाए रखना था।

भारत के इकोटूरिज्म मॉडल में बदलाव

Frontline Thehindu द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट भारतीय पर्यटन के परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव को उजागर करती है। प्रकाशन के अनुसार, देश ने इकोटूरिज्म (पारिस्थितिक पर्यटन) के प्रति अपने दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से बदल दिया है, जो संरक्षण पर आधारित ढांचे से हटकर तेजी से व्यावसायीकरण द्वारा परिभाषित मॉडल की ओर बढ़ गया है। इस विकास ने उन पर्यावरणीय और सामुदायिक आधारों पर दीर्घकालिक प्रभाव के संबंध में चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिन्हें मूल रूप से इस क्षेत्र को परिभाषित करने के लिए बनाया गया था।

मूल संघर्ष को समझना

इकोटूरिज्म की अवधारणा पारंपरिक रूप से पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के समर्थन के सिद्धांतों पर बनी है। हालांकि, रिपोर्ट बताती है कि भारतीय संदर्भ में, इन आधारभूत स्तंभों से समझौता किया गया है। जैसे-जैसे उद्योग बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण की ओर बढ़ा है, मूल उद्देश्य—प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना और साथ ही स्थानीय आबादी को लाभ पहुंचाना—कमजोर हो गया है।

रिपोर्ट में प्रस्तुत मुख्य तर्क इस प्रकार हैं:

  • व्यावसायीकरण बनाम संरक्षण: उद्योग पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण के बजाय लाभ-संचालित गतिविधियों को प्राथमिकता दे रहा है।
  • सिद्धांतों का क्षरण: व्यावसायीकृत मॉडल की ओर संक्रमण ने उन विशिष्ट पारिस्थितिक और समुदाय-उन्मुख लक्ष्यों को कमजोर कर दिया है जो प्रामाणिक इकोटूरिज्म के लिए आवश्यक हैं।
  • संस्थागत बदलाव: रिपोर्ट प्राकृतिक क्षेत्रों में पर्यटन के प्रबंधन और प्रचार के तरीके में एक प्रणालीगत बदलाव की पहचान करती है।

पारिस्थितिक और सामुदायिक अखंडता के लिए निहितार्थ

Frontline Thehindu द्वारा दी गई आलोचना बताती है कि जब पर्यटन मुख्य रूप से व्यावसायिक हितों से प्रेरित होता है, तो उद्योग का "इको" (पारिस्थितिक) घटक बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। इकोटूरिज्म का अर्थ एक ऐसी स्थायी प्रथा है जो नाजुक वातावरण पर मानवीय पदचिह्न को कम करती है। जब ध्यान तेजी से विस्तार और उच्च-मात्रा वाले पर्यटन पर केंद्रित होता है, तो प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव अक्सर बढ़ जाता है, जो पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य के विपरीत है।

इसके अलावा, रिपोर्ट सामुदायिक सिद्धांतों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव की ओर इशारा करती है। प्रामाणिक इकोटूरिज्म मॉडल अक्सर स्थानीय समुदायों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करके और यह सुनिश्चित करके कि उन्हें पर्यटन राजस्व से लाभ मिले, उन्हें सशक्त बनाने का लक्ष्य रखते हैं। जब उद्योग अत्यधिक व्यावसायीकृत हो जाता है, तो इन समुदाय-केंद्रित लक्ष्यों को केंद्रीकृत या बड़े पैमाने के कॉर्पोरेट हितों के पक्ष में दरकिनार किया जा सकता है।

निष्कर्षों का सारांश

स्रोत द्वारा प्रदान किया गया आकलन भारत के प्राकृतिक स्थानों में यात्रा और आतिथ्य की वर्तमान स्थिति का एक महत्वपूर्ण अवलोकन है। व्यावसायिक विकास को प्राथमिकता देकर, यह क्षेत्र उन गुणों को खोने के जोखिम का सामना कर रहा है जो इकोटूरिज्म को मानक पर्यटन से अलग करते हैं। जैसा कि रिपोर्ट में कहा गया है:

भारत ने इकोटूरिज्म को संरक्षण-उन्मुख मॉडल से बदलकर एक तेजी से व्यावसायीकृत पर्यटन उद्योग बना दिया है, और ऐसा करके उन पारिस्थितिक और सामुदायिक सिद्धांतों को कमजोर कर दिया है जिन्हें इकोटूरिज्म को बनाए रखना था।

यह बदलाव क्षेत्र की दिशा में एक मौलिक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है, जो उन संरक्षण-आधारित जनादेशों से और दूर जा रहा है जिन्हें मूल रूप से देश की विविध पारिस्थितिक विरासत की रक्षा के लिए स्थापित किया गया था।

लेखक और स्रोत की जानकारी

इस लेख के लेखक: prakriti srivastava; ghazala shahabuddin.

स्रोत: Frontline Thehindu
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